अटल बिहारी जी की जयंती पर पुरानी तस्वीर के साथ याद ताजा हो गई

 अटल जी की कई वर्ष पुरानी तस्वीर को संभाल कर रखे हुए हैं राजेंद्र सिंह राठी

अटल बिहारी वाजपेई के पिलखुवा आगमन की यादें आज भी लोगों के दिल में है उनके  दौरे को आज भी याद करते हैं
 
 पिलखुवा 
पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई बेशक आज दुनिया में नहीं है लेकिन उनकी यादें आज भी लोगों के दिल में  हैं ऐसा ही  हैंडलूम नगरी पिलखुवा  है अटल बिहारी वाजपेई पिलखुवा से विशेष लगाव रखते थे  लेखक शिव कुमार  गोयल  दुनिया छोड़ चुके हैं लेकिन   आज भी शिवकुमार  गोयल और अटल बिहारी वाजपेई की वार्तालाप को याद करते हैं अटल बिहारी वाजपेई की शिवकुमार गोयल से पत्राचार के माध्यम से वार्ता होती रहती थी दोनों स्वभाव से कवि थे और यही बात थी कि दोनों के बीच काफी मधुर संबंध थे सांसद रहते हुए अटल बिहारी वाजपेई ने गोयल को पत्र लिखकर उनका हाल-चाल जाना था पिलखुवा बीच पट्टी निवासी  शिवकुमार गोयल आज इस दुनिया में नहीं है लेकिन राजनीति, साहित्य, पत्रकारिता के क्षेत्र में उनकी अपनी पहचान थी उन्होंने अनेक किताबें लिखी थी साहित्य और पत्रकारिता से जुड़ाव होने के कारण शिव कुमार गोयल अटल बिहारी वाजपेई के बेहद करीब भी हो गए थे कई मंचों पर अटल बिहारी वाजपेई ने सिर्फ उनका जिक्र किया बल्कि पत्राचार के जरिए उनके हाल-चाल लेते रहते थे अटल बिहारी वाजपेई द्वारा लिखित पत्रों में साहित्य और सादगी झलक साफ नजर आती थी अटल बिहारी वाजपेई पिलखुवा में

 वर्ष 1991 शिवकुमार गोयल  के  संग्रहालय को देखने के लिए भी अटल बिहारी वाजपेई आए थे बाजपेई द्वारा नगर में सभा को संबोधित किया और हैंडलूम नगरी की प्रशंसा की उनके द्वारा पिलखुआ क्षेत्र को महत्व देने के लिए नगर की ओर से उन्हें प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित भी किया  गया था

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